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Reproductive Surgery

गर्भाशय की रसौली (Fibroids) और गर्भधारण: कब इलाज ज़रूरी है

हर fibroid गर्भधारण में रुकावट नहीं बनती। जानें किस स्थिति और आकार की रसौली मायने रखती है और कब सर्जरी से फायदा होता है।

Medically reviewed by Dr. Munawwer Sana, MRCOG, FACOG — last reviewed 25 September 2026
By · MBBS, MRCOG (UK), FACOG, FRM, MSc · Fertility & Reproductive Medicine, Hyderabad
Published 25 September 2026 · Last updated · 3 min read
Editorial photograph illustrating reproductive surgery care: गर्भाशय की रसौली (Fibroids) और गर्भधारण: कब इलाज ज़रूरी है

ultrasound रिपोर्ट में “fibroid” पढ़कर कई महिलाएँ घबरा जाती हैं। मैं डॉ. मुनव्वर सना अपने clinic में रोज़ यह सवाल सुनती हूँ: “डॉक्टर साहिबा, क्या इस रसौली की वजह से मैं माँ नहीं बन पा रही?” सच्चाई यह है कि fibroids बहुत आम हैं — कई महिलाओं में होती हैं और उनमें से अधिकांश बिना किसी दिक्कत के गर्भधारण करती हैं। मायने यह रखता है कि रसौली कहाँ है, कितनी बड़ी है और आपके लक्षण क्या हैं।

Fibroids क्या होती हैं?

Fibroids गर्भाशय की माँसपेशियों से बनी अच्छी (non-cancerous) रसौलियाँ होती हैं। ये कैंसर नहीं होतीं और अक्सर कोई लक्षण नहीं देतीं। इनकी स्थिति के हिसाब से तीन मुख्य प्रकार होते हैं: गर्भाशय की अंदरूनी गुहा के अंदर (submucosal), दीवार के बीच में (intramural), और बाहरी सतह पर (subserosal)।

गर्भधारण पर असर कब पड़ता है?

गर्भधारण के लिए सबसे अहम है गर्भाशय की अंदरूनी गुहा, जहाँ भ्रूण टिकता है। submucosal fibroids — जो गुहा के अंदर उभरती हैं — implantation में बाधा डाल सकती हैं और गर्भस्राव का जोखिम बढ़ा सकती हैं। दीवार के अंदर की बड़ी intramural fibroids भी गुहा का आकार बिगाड़ सकती हैं। बाहर की subserosal fibroids आमतौर पर गर्भधारण को प्रभावित नहीं करतीं।

कौन-से लक्षण ध्यान देने योग्य हैं?

  • पीरियड में बहुत ज़्यादा या लंबे समय तक bleeding
  • पीरियड में तेज दर्द या पेट में भारीपन
  • पेशाब बार-बार आना या कब्ज (बड़ी रसौली दबाव डाल सकती है)
  • गर्भधारण में देरी या बार-बार गर्भस्राव

जाँच कैसे होती है?

सबसे पहले ultrasound से रसौलियों का नक्शा बनता है — कितनी हैं, कहाँ हैं, कितनी बड़ी हैं। गुहा का सटीक आकलन के लिए 3D ultrasound या saline sonography मदद करती है। कुछ मामलों में hysteroscopy — पतले दूरबीन जैसे यंत्र से गर्भाशय के अंदर देखना — सबसे सही जानकारी देती है।

इलाज के विकल्प क्या हैं?

हर fibroid को निकालना ज़रूरी नहीं। अगर रसौली छोटी है, गुहा से दूर है और कोई लक्षण नहीं है, तो सिर्फ निगरानी काफी है। गर्भधारण में बाधा डालने वाली submucosal fibroids को hysteroscopy से बिना पेट काटे निकाला जा सकता है। बड़ी intramural fibroids के लिए laparoscopic myomectomy — छोटे छेदों से रसौली निकालकर गर्भाशय को बचाना — विकल्प है। सर्जरी का फैसला आपकी उम्र, रसौली की स्थिति और गर्भधारण की योजना देखकर होता है।

IVF की योजना हो तो क्या करें?

IVF से पहले गर्भाशय की गुहा का आकलन बहुत ज़रूरी है। अगर गुहा के अंदर या उसे दबाने वाली रसौली हो तो पहले उसे दुरुस्त करना embryo transfer की सफलता के लिए बेहतर होता है। यह निर्णय आपके fertility specialist और imaging रिपोर्ट मिलकर तय करते हैं।

कुछ आम भ्रम और सच्चाई

  • भ्रम: “Fibroid है तो गर्भाशय निकालना पड़ेगा।” सच: गर्भधारण चाहने वाली महिलाओं में गर्भाशय बचाकर इलाज होता है।
  • भ्रम: “Fibroid कैंसर बन जाती है।” सच: fibroids का कैंसर में बदलना अत्यंत दुर्लभ है।
  • भ्रम: “सर्जरी के बाद कभी माँ नहीं बन सकते।” सच: myomectomy के बाद कई महिलाएँ सफलतापूर्वक गर्भधारण करती हैं।

रसौली का नाम सुनकर डरने की बजाय उसका सही आकलन करवाइए — कई बार कुछ करने की ज़रूरत नहीं होती, और जब ज़रूरत होती है तो आज के तरीके सुरक्षित और गर्भाशय बचाने वाले हैं। अपनी रिपोर्ट की समीक्षा के लिए डॉ. मुनव्वर सना से अपोलो फर्टिलिटी, बंजारा हिल्स, हैदराबाद में या ऑनलाइन video consultation के ज़रिए मिलने के लिए यहाँ क्लिक करके अपना appointment बुक करें।

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References & clinical guidelines

  1. Indian Council of Medical Research — National ART Guidelines and the ART (Regulation) Act, 2021
  2. ESHRE — European Society of Human Reproduction and Embryology, clinical practice guidelines
  3. NICE CG156 — Fertility problems: assessment and treatment
  4. Royal College of Obstetricians and Gynaecologists — patient information and guidelines
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