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ICSI क्या है: कब ज़रूरी होता है और कैसे काम करता है

ICSI में एक शुक्राणु सीधे अंडे में डाला जाता है। जानें यह तकनीक किन स्थितियों में मदद करती है और सामान्य IVF से कैसे अलग है।

Medically reviewed by Dr. Munawwer Sana, MRCOG, FACOG — last reviewed 25 September 2026
By · MBBS, MRCOG (UK), FACOG, FRM, MSc · Fertility & Reproductive Medicine, Hyderabad
Published 25 September 2026 · Last updated · 3 min read
Editorial photograph illustrating ivf care: ICSI क्या है: कब ज़रूरी होता है और कैसे काम करता है

जब शुक्राणुओं की संख्या या गुणवत्ता कम होती है, तो lab में एक विशेष तकनीक काम आती है — ICSI। मैं डॉ. मुनव्वर सना अपने clinic में दंपत्तियों को अक्सर यह शब्द सुनाती हूँ और ज़्यादातर लोगों के चेहरे पर सवाल होता है: “यह IVF से अलग कैसे है?” इस लेख में मैं सरल भाषा में समझाऊँगी कि ICSI क्या है, कब ज़रूरी है और कब नहीं।

ICSI का मतलब क्या है?

ICSI का पूरा नाम intracytoplasmic sperm injection है। सामान्य IVF में अंडे के चारों ओर कई शुक्राणु रखे जाते हैं और निषेचन अपने आप होता है। ICSI में embryologist सूक्ष्मदर्शी के नीचे एक-एक स्वस्थ शुक्राणु चुनकर सीधे अंडे के अंदर डालते हैं। यानी शुक्राणु को अंडे की दीवार खुद भेदनी नहीं पड़ती — हम उसकी मदद कर देते हैं।

किन स्थितियों में ICSI की सलाह दी जाती है?

  • शुक्राणुओं की संख्या बहुत कम होना (severe oligospermia)
  • शुक्राणुओं की गति या आकार खराब होना
  • पिछले IVF चक्र में निषेचन न हुआ हो या बहुत कम हुआ हो
  • शुक्राणु सर्जरी से निकाले गए हों (जैसे TESA/PESA)
  • frozen शुक्राणु इस्तेमाल हो रहे हों
  • PGT (भ्रूण की आनुवंशिक जाँच) की योजना हो

क्या हर IVF में ICSI ज़रूरी है?

नहीं। यह एक आम भ्रम है। जहाँ शुक्राणु सामान्य हों और पहले निषेचन की कोई समस्या न रही हो, वहाँ सामान्य IVF उतना ही अच्छा काम करता है। ICSI एक शानदार तकनीक है, लेकिन इसका इस्तेमाल तभी करना चाहिए जब इसकी वैज्ञानिक वजह हो। मेरे clinic में यह फैसला शुक्राणु रिपोर्ट और पिछले इतिहास को देखकर लिया जाता है, न कि एक निश्चित formula से।

प्रक्रिया कैसे होती है?

महिला की तरफ प्रक्रिया सामान्य IVF जैसी ही रहती है — injections से अंडे तैयार होते हैं, फिर छोटी प्रक्रिया से अंडे निकाले जाते हैं। अंतर lab में होता है: उसी दिन embryologist हर परिपक्व अंडे में एक चुना हुआ शुक्राणु डालते हैं। अगले दिन पता चलता है कि कितने अंडे निषेचित हुए। फिर भ्रूण 3 से 5 दिन तक lab में बढ़ते हैं और उसके बाद embryo transfer होता है।

सफलता और सुरक्षा को लेकर क्या जानना चाहिए?

ICSI से निषेचन की दर अच्छी होती है, लेकिन यह समझना ज़रूरी है कि ICSI भ्रूण की गुणवत्ता को बदलता नहीं — वह अंडे और शुक्राणु की उम्र और स्वास्थ्य पर निर्भर करती है। दशकों के अनुभव और अध्ययनों से ICSI सुरक्षित माना जाता है; फिर भी हर तकनीक की तरह इसके फायदे और सीमाएँ आपके मामले के हिसाब से समझनी चाहिए।

लागत और तैयारी

ICSI में lab का अतिरिक्त काम जुड़ता है, इसलिए इसकी लागत सामान्य IVF से कुछ अधिक होती है। सटीक लागत आपकी योजना पर निर्भर करती है और consultation में स्पष्ट बताई जाती है। तैयारी में पुरुषों को 2–3 दिन की abstinence के बाद sample देना होता है; धूम्रपान, शराब और गर्मी (सौना, टाइट कपड़े) से बचना शुक्राणु गुणवत्ता के लिए मददगार है।

कुछ आम भ्रम और सच्चाई

  • भ्रम: “ICSI से सफलता पक्की होती है।” सच: ICSI निषेचन में मदद करता है, प्रेग्नेंसी की गारंटी नहीं।
  • भ्रम: “ICSI में बच्चों को खतरा होता है।” सच: दशकों के अध्ययनों में यह तकनीक सुरक्षित पाई गई है।
  • भ्रम: “शुक्राणु कम हों तो कुछ नहीं हो सकता।” सच: बहुत कम शुक्राणुओं में भी ICSI से पितृत्व संभव है।

सही मामले में ICSI एक छोटा सूई-सा कदम है जो बड़ा फर्क डालता है। आपके लिए IVF सही है या ICSI, यह जानने के लिए डॉ. मुनव्वर सना से अपोलो फर्टिलिटी, बंजारा हिल्स, हैदराबाद में या ऑनलाइन video consultation के ज़रिए मिलने के लिए यहाँ क्लिक करके अपना appointment बुक करें।

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References & clinical guidelines

  1. Indian Council of Medical Research — National ART Guidelines and the ART (Regulation) Act, 2021
  2. ESHRE — European Society of Human Reproduction and Embryology, clinical practice guidelines
  3. NICE CG156 — Fertility problems: assessment and treatment
  4. Royal College of Obstetricians and Gynaecologists — patient information and guidelines
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