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बार-बार गर्भस्राव: कारण, जाँच और आगे की राह

दो या उससे ज़्यादा गर्भस्राव के बाद व्यवस्थित जाँच से अक्सर कारण मिल जाता है। जानें कौन-सी जाँचें होती हैं और अगली प्रेग्नेंसी की तैयारी कैसे करें।

Medically reviewed by Dr. Munawwer Sana, MRCOG, FACOG — last reviewed 24 September 2026
By · MBBS, MRCOG (UK), FACOG, FRM, MSc · Fertility & Reproductive Medicine, Hyderabad
Published 24 September 2026 · Last updated · 3 min read
Editorial photograph illustrating ivf care: बार-बार गर्भस्राव: कारण, जाँच और आगे की राह

बार-बार गर्भस्राव का दर्द सिर्फ शारीरिक नहीं होता। हर बार उम्मीद जागती है और हर बार टूटती है। मैं डॉ. मुनव्वर सना, fertility specialist, अपने clinic में ऐसे दंपत्तियों से रोज़ मिलती हूँ जो पूछते हैं: “क्या हमें कभी बच्चा होगा?” मेरा जवाब हमेशा वैज्ञानिक तथ्यों से शुरू होता है: दो या उससे अधिक गर्भस्राव के बाद व्यवस्थित जाँच कराने पर लगभग आधे मामलों में कोई कारण मिल जाता है, और बाकी में भी अगली प्रेग्नेंसी की सही योजना से सफलता की संभावना काफी अच्छी रहती है।

कितने गर्भस्राव के बाद जाँच करानी चाहिए?

अंतरराष्ट्रीय दिशानिर्देशों के अनुसार दो या उससे अधिक गर्भस्राव होने पर जाँच शुरू करनी चाहिए। पहले गर्भस्राव के बाद ही जाँच करानी चाहिए अगर महिला की उम्र 35 वर्ष से अधिक हो, गर्भस्राव बार-बार एक ही समय पर हुआ हो, या पहले से कोई बीमारी हो। जल्दबाज़ी में इलाज शुरू करने के बजाय पहले कारण खोजना ज़रूरी है, क्योंकि हर कारण का इलाज अलग है।

मुख्य कारण क्या हो सकते हैं?

सबसे आम कारण भ्रूण के गुणसूत्रों (chromosomes) की गड़बड़ी है — यह अक्सर संयोग से होता है और माता-पिता की कोई गलती नहीं होती। इसके अलावा जाँच में ये बातें देखी जाती हैं:

  • गर्भाशय की बनावट: गर्भाशय में पारदर्शी झिल्ली (septum), fibroids या चिपकाव
  • थायरॉइड और prolactin जैसे हॉर्मोन का असंतुलन
  • रक्त के जमने से जुड़ी समस्याएँ (antiphospholipid syndrome)
  • मधुमेह या PCOS जैसी मौजूदा बीमारियाँ
  • माता-पिता के गुणसूत्रों की जाँच (karyotype)

जाँच की प्रक्रिया कैसे होती है?

मेरी practice में जाँच एक निश्चित क्रम में होती है ताकि समय और पैसा दोनों बचें। पहले विस्तृत इतिहास लिया जाता है — गर्भस्राव किस सप्ताह में हुए, क्या दिल की धड़कन दिखी थी, क्या कोई जाँच हुई थी। फिर रक्त जाँचें, 3D ultrasound से गर्भाशय की बनावट देखी जाती है, और ज़रूरत पड़ने पर गुणसूत्रों की जाँच होती है। अगर पिछले गर्भस्राव का टिश्यू परीक्षण उपलब्ध हो तो वह भी बहुत मदद करता है।

इलाज कैसे तय होता है?

इलाज पूरी तरह कारण पर निर्भर करता है। गर्भाशय की septum को छोटी सर्जरी से ठीक किया जा सकता है। थायरॉइड की गड़बड़ी दवा से संभलती है। antiphospholipid syndrome में रक्त पतला करने वाली दवाएँ अगली प्रेग्नेंसी में मदद करती हैं। जब भ्रूण के गुणसूत्रों की गड़बड़ी बार-बार मिले तो IVF के साथ PGT (भ्रूण की आनुवंशिक जाँच) एक विकल्प हो सकता है। और जब कोई कारण न मिले — जो आधे मामलों में होता है — तो भी अनुभव बताता है कि सावधान निगरानी और सहयोग के साथ अगली प्रेग्नेंसी सफल हो सकती है।

भावनात्मक देखभाल भी इलाज का हिस्सा है

गर्भस्राव के बाद अपराधबोध, डर और अकेलापन बहुत आम हैं। मैं अपनी मरीज़ों से हमेशा कहती हूँ: यह आपकी गलती नहीं थी। अगली कोशिश से पहले मन को भी तैयार होने दें। ज़रूरत हो तो counselling लें — यह कमज़ोरी नहीं, समझदारी है।

अगली प्रेग्नेंसी से पहले क्या करें?

  • folic acid शुरू करें और वज़न संतुलित रखें
  • थायरॉइड और मधुमेह नियंत्रित रखें
  • धूम्रपान और शराब पूरी तरह छोड़ें
  • प्रेग्नेंसी की पुष्टि होते ही जल्दी संपर्क करें ताकि शुरुआती निगरानी हो सके

बार-बार गर्भस्राव के बाद भी अधिकांश दंपत्तियों के घर बच्चा आता है — बस सही जाँच, सही समय और सही साथ चाहिए। अपनी व्यक्तिगत जाँच और योजना के लिए डॉ. मुनव्वर सना से अपोलो फर्टिलिटी, बंजारा हिल्स, हैदराबाद में या ऑनलाइन video consultation के ज़रिए मिलने के लिए यहाँ क्लिक करके अपना appointment बुक करें।

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References & clinical guidelines

  1. Indian Council of Medical Research — National ART Guidelines and the ART (Regulation) Act, 2021
  2. ESHRE — European Society of Human Reproduction and Embryology, clinical practice guidelines
  3. NICE CG156 — Fertility problems: assessment and treatment
  4. Royal College of Obstetricians and Gynaecologists — patient information and guidelines
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